झारखण्ड की राजनीती में पलामू प्रमंडल का महत्वपूर्ण हस्तछेप झारखण्ड गठन के बाद से अब तक रहा हैं,लेकिन राजनितिक से उर्वरा पलामू की धरती तो मूल रूप से उग्रवाद,बेरोजगारी,और सुखाड प्रमुख समस्या हैं! जंगल से आच्छादित यह इलाका सूखे के चपेट में हर बार की तरह इस बार भी हैं! यहाँ की कोयल औरंगा और अमानत नदी प्रमुख नदिया हैं। पिछले 8 वर्ष में पलामू प्रमंडल में मनरेगा के तहत लगभग 2000 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं!लेकिन फिर भी पलामू सुखे की चपेट में हर साल रहती हैं।अब सवाल उठता हैं की पलामू ऐसे राजनितिक शक्रिय जगह में विकाश क्यों नहीं हुवा हैं?आखिर इतने बड़े पैमाने पर रुपई खर्च होने के बाद भी पलामू वही खड़ा हैं जहाँ वह बिहार से झारखण्ड बनने के समय था!आखिर क्या कारण है!
पलामू की बदहाली में सबसे प्रमुख कारण यहाँ के राजनेता हैं जो सत्ता में रहकर भी सिर्फ अपनी कुर्शी बचाने में रहे और स्वार्थ सिद्धि में लगे रहे!इन्दर सिंह नामधारी बिहार सरकार में मंत्री रहे,अवधेश सिंह बिहार सरकार में मंत्री रहे!संकतेस्वर सिंह उर्फ़ सन्तु सिंह भी बिहार सरकार में मंत्री रहे!झारखण्ड गठन के बाद इन्दर सिंह नामधारी ने स्पीकर रहे,मधु सिंह मंत्री रहे,बैजनाथ राम मंत्री रहे,कमलेश सिंह,भानुप्रताप शाही,ददय दुबे,,और अब kn त्रिपाठी राज्य सरकार में मंत्री हैं!मतलब पलामू से हमेशा राज्य सरकार में भागीदारी रहीं! दबंग विधायक विदेश सिंह का भी सरकार को समर्थन प्राप्तहैं!फिर भी पलामू भूखा और शूखा क्यूँ!कौन है जिम्मेवार!इतनी बड़ी राशी खर्च होने के बाद भी पलामू का खेवनहार कौन बनेगा! पलामू में पर्तिबधित naxali संगठन समेत लगभग दो दर्जन आपराधिक गिरोह शक्रिया है जिन्हें राजनितिक सनरछन प्राप्त हैं! यहाँ के राजनेता चुनाव जितने के लिए इन संगठन से लाभ लेते हैं जिसका जिक्र पुलिसिया फाइल में दर्ज हैं! लेकिन आज तक इनलोगों पर कार्रवाई करने में पुलिस के हाथ कांपते हैं! यहाँ राजनितिक हस्तछेप के कारण कोई भी पदाधिकारी पलामू प्रमंडल में अपनी पोस्टिंग को सजा के तौर पर लेता हैं!और अपना समय किसी तरह काटते हैं! यहाँ पदस्थापित नौकरशाहों को राज्नेतावों द्वारदबाव देकर वोट बैंक की खातिर गलत करने को कहा जाता हैं! यहाँ एक पुल को बनने में 30 साल लग गए! आखिर क्यों!.
पलामू की बदहाली में सबसे प्रमुख कारण यहाँ के राजनेता हैं जो सत्ता में रहकर भी सिर्फ अपनी कुर्शी बचाने में रहे और स्वार्थ सिद्धि में लगे रहे!इन्दर सिंह नामधारी बिहार सरकार में मंत्री रहे,अवधेश सिंह बिहार सरकार में मंत्री रहे!संकतेस्वर सिंह उर्फ़ सन्तु सिंह भी बिहार सरकार में मंत्री रहे!झारखण्ड गठन के बाद इन्दर सिंह नामधारी ने स्पीकर रहे,मधु सिंह मंत्री रहे,बैजनाथ राम मंत्री रहे,कमलेश सिंह,भानुप्रताप शाही,ददय दुबे,,और अब kn त्रिपाठी राज्य सरकार में मंत्री हैं!मतलब पलामू से हमेशा राज्य सरकार में भागीदारी रहीं! दबंग विधायक विदेश सिंह का भी सरकार को समर्थन प्राप्तहैं!फिर भी पलामू भूखा और शूखा क्यूँ!कौन है जिम्मेवार!इतनी बड़ी राशी खर्च होने के बाद भी पलामू का खेवनहार कौन बनेगा! पलामू में पर्तिबधित naxali संगठन समेत लगभग दो दर्जन आपराधिक गिरोह शक्रिया है जिन्हें राजनितिक सनरछन प्राप्त हैं! यहाँ के राजनेता चुनाव जितने के लिए इन संगठन से लाभ लेते हैं जिसका जिक्र पुलिसिया फाइल में दर्ज हैं! लेकिन आज तक इनलोगों पर कार्रवाई करने में पुलिस के हाथ कांपते हैं! यहाँ राजनितिक हस्तछेप के कारण कोई भी पदाधिकारी पलामू प्रमंडल में अपनी पोस्टिंग को सजा के तौर पर लेता हैं!और अपना समय किसी तरह काटते हैं! यहाँ पदस्थापित नौकरशाहों को राज्नेतावों द्वारदबाव देकर वोट बैंक की खातिर गलत करने को कहा जाता हैं! यहाँ एक पुल को बनने में 30 साल लग गए! आखिर क्यों!.